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भारत के वैज्ञानिकों द्वारा मंगल ग्रह पर तीन नए क्रेटर की खोज 

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भारत के अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर तीन नए क्रेटर की खोज की।

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इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (आईएयू) ने इन गड्ढों का नाम पूर्व पीआरएल निदेशक और दो भारतीय शहरों के नाम पर रखने को मंजूरी दे दी है।

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इन तीन क्रेटरों का नाम लाल क्रेटर, मुरसन क्रेटर और हिल्सा क्रेटर है। 

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65 किमी चौड़ा लाल क्रेटर, प्रसिद्ध भारतीय भूभौतिकीविद् और पीआरएल के पूर्व निदेशक प्रोफेसर देवेन्द्र लाल का सम्मान करता है।

10 किमी चौड़ा मुरसान क्रेटर का नाम भारत के उत्तर प्रदेश के एक शहर के नाम पर रखा गया है।

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हिल्सा क्रेटर, जो 10 किमी चौड़ा है, का नाम भारत के बिहार के एक शहर के नाम पर रखा गया है।

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मुरसान और हिलसा क्रमशः पीआरएल वैज्ञानिक डॉ. अनिल भारद्वाज और डॉ. राजीव रंजन भारती की जन्मस्थली हैं।

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रडार डेटा से लाल क्रेटर के नीचे मोटी तलछटी जमा का पता चला है, जो मंगल ग्रह पर पिछले जल प्रवाह का संकेत देता है।

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इस खोज क अनुसार मंगल ग्रह पर लाल क्रेटर पूरी तरह से लावा से ढाका हुआ है।

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मंगल टोही ऑर्बिटर के उपसतह राडार डाटा ने, मोटी तलछटी जमा की खोज की है, जो इस बात का सबूत है कि पानी कभी मंगल की सतह पर बेहटा था।

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यह खोज मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास और जीवन की संभावना को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

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Source: TOI