वैश्वीकरण क्या है : वैश्वीकरण के 5 कारणऔर प्रभाव

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारी रोज़ मर्रा की जिंदगी में हम बहुत सारी ऐसी चीजें चाहते हैं या प्रभावित होते हैं जो दूसरे देश की होती हैं जैसे कि मोबाइल फोनफिल्में, भोजन, कपडे आदि मैं आज कल हमारे लिए दुनिया की हर चीज को देखना और इस्तमाल करना बहुत ज्यादा आसान हो गया है, और इसका कारण वैश्वीकरण हैतो यहाँ सवाल ये उठता है कि वैश्वीकरण क्या है उसके क्या कारण हैं और क्या प्रभाव हैI तो ऐसे वैश्वीकरण के बारे में विस्तार से जानेंI

वैश्वीकरण क्या है

वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं, वैश्वीकरण क्या है?

वैश्वीकरण एक मल्टीडिमेंशनल प्रक्रिया है जिसमें वैश्विक स्तर परअर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों, समाजों और टेक्नोलोजियों का एकीकरण और इंटरेक्शन शामिल है। यह एक बड़े नेटवर्क की तरह है जहां जानकारी, पैसा, सामान और विचार दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बीच आसानी से स्थानांतरित (transfer)हो सकते हैI ऐसा प्रौद्योगिकी(Technologies), परिवहन और संचार में सुधार के कारण होता है। उदाहरण के लिए, आप दूसरे देश में बने कपड़े पहन सकते हैं, दुनिया के विभिन्न हिस्सों का खाना खा सकते हैं, या विभिन्न देशों के हिस्सों वाले स्मार्टफोन का उपयोग कर सकते हैं।

वैश्वीकरण की विशेषता राष्ट्रीय सीमाओं के पार वस्तुओं(goods), सेवाओं(services), पूंजी(capital), सूचना(Information) और लोगों का प्रवाह है, जिससे वैश्विक बाज़ार का उदय होता है और दुनिया भर में विचारों और ज्ञान का आदान-प्रदान होता है। इसमें आर्थिक(economic) वैश्वीकरण, सांस्कृतिक(cultural) वैश्वीकरण, तकनीकी(technological) वैश्वीकरण और राजनीतिक(political) वैश्वीकरण जैसे विभिन्न पहलू शामिल हैंI.

वैश्वीकरण के परिणाम स्वरूप आर्थिक विकास, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अवसर ज़रूर पैदा हुए हैं, लेकिन इसने असमानता, सांस्कृतिक एकरूपता, पर्यावरणीय गिरावट और जियो- पॉलिटिकल तनाव जैसी चुनौतियों को भी जन्म दिया है। कुल मिलाकर, वैश्वीकरण एक जटिल(complex) और गतिशील(dynamic) घटना है जो कंटेम्पररी दुनिया को गहन तरीकों से आकार देती है, जो व्यक्तियों, समुदायों और राष्ट्रों के सामने आने वाले अवसरों और चुनौतियों दोनों को प्रभावित करती है।

भारत में वैश्वीकरण

भारत में वैश्वीकरण के कारण इसकी अर्थव्यवस्था, समाज और संस्कृति में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। 1990 के दशक की शुरुआत से, भारत ने आर्थिक उदारीकरण(Economic libralization) को अपनाया और अपने बाज़ारों को विदेशी निवेश और व्यापार(Investment and trade) के लिए खोल दिया। इसकी वजह से  भारत में इकोनॉमिक ग्रोथ  खासकर इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज जैसे सेक्टर में तेज़ रफ्तार से हुई I

 वैश्वीकरण ने भारतीय बुसिनेस्सेस को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला(supply chain) में एकीकरण की सुविधा प्रदान की है, जिससे निर्यात(export) और रोजगार (employment)सृजन में वृद्धि हुई है। हालाँकि, वैश्वीकरण ने चुनौतियाँ भी लायी हैं, जिनमें नौकरी विस्थापन(displacement), आय असमानता और पारंपरिक उद्योगों पर प्रभाव की चिंताएँ शामिल हैं। भारत इन जटिलताओं से निपटना जारी रखता है, समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए इससे जुड़ी चुनौतियों का समाधान करते हुए वैश्वीकरण द्वारा प्रस्तुत अवसरों का लाभ उठाने का प्रयास कर रहा है।

वैश्वीकरण के कारण और प्रभाव

वैश्वीकरण के 5 कारण

वैश्वीकरण के 5 कारण:

  • आर्थिकउदारीकरण(Economic liberalisation): आर्थिक liberalisation नीतियों का एक समूह है जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में सरकारी दखल अंदाजी को कम करना और फ़्री मार्केट के principles को भड़ावा देना है। इसमें ,डीरेग्युलेशन, निजीकरण और ट्रेड लिबरलाइज़ेशन जैसे उपाय शामिल हैं। आर्थिक उदारीकरण का लक्ष्य एक अधिक कुशल और प्रतिस्पर्धी आर्थिक माहौल बनाना है जो इनोवेशन, निवेश और विकास को बढ़ावा दे। प्रवेश की बाधाओं को कम करके और बाजार की ताकतों को कीमतों और संसाधनों के allotment को निर्धारित करने की अनुमति देकर, आर्थिक उदारीकरण का उद्देश्य(aim) ओवरआल आर्थिक प्रदर्शन में सुधार करना और लिविंग स्टैण्डर्ड को भड़ाना है।
  • टेक्नोलॉजी में प्रगति: टेक्नोलॉजी में प्रगति ने संचार और परिवहन जैसी बिज़नेस प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण में व्यापक(comprehensive) सुधार करके वैश्वीकरण में क्रांति ला दी है। इंटरनेट, इंस्टेंट मैसेजिंग सेवाएं और सोशल मीडिया के उदय ने दुनिया भर में इंस्टेंट कम्युनिकेशन की सुविधा प्रदान की है और इसके अलावा एक बड़े पैमाने पर कल्चरल व सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सहयोग को भी बढ़ावा दिया है। इसी तरह, परिवहन में इनोवेशन, जैसे कंटेनरीकरण और हवाई माल ट्रांसपोर्टेशन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर माल ले जाने से जुड़ी लागत और समय को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे व्यापार को ग्लोबल ट्रेड में अधिक कुशलता से शामिल होने में सक्षम बनाया गया है। इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान के सिस्टम्स सहित बिज़नेस प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण ने कंपनियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और कंस्यूमर्स तक पहुंचने के नए-नए अवसर खोल दिए है, इसके अलावा एंट्री बैरियर्स को भी दूर किया है और ग्लोबल कनेक्टिविटी का विस्तार भी किया है।
  • ग्लोबल सप्लाई चेन्स: ग्लोबल सप्लाई चेन्स कुशलतापूर्वक माल बनाने और डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए विश्व स्तर पर प्रोडूसर्स, सप्लायर्सऔर डिस्ट्रीब्यूटर्स को जोड़ती हैं। टेक्नोलॉजी, ट्रांसपोर्टेशन और व्यापार उदारीकरण में प्रगति के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन्समेंकाफी भढ़ोतरी हुई है । इन सप्लाई चेन्स में ग्लोबल मार्केट्स के लिए सामान बनाने के लिए कई देशों से मटेरियलस और कंपोनेंट्स की सोर्सिंग शामिल है, जो खंडित प्रोडक्शन प्रोसेस और बेहतर लॉजिस्टिक्स द्वारा ऑपरेट होती है। ट्रेड एग्रीमेंटस और कम टैरिफ ने माल की सीमा पार आवाजाही को काफी ज़्यादा आसान बना दिया है , जिसने कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय प्रोडक्शन नेटवर्क को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। हालाँकि, इसमें काफी ज़्यादा जोखिम भी होते है, जैसे प्राकृतिक आपदाओं और जियोपॉलिटिकल तनाव से होने वाली दिक्कतें, इन परेशानियों से बचने के लिए हमें स्ट्रांग रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रेटेजीज की ज़रुरत होतI
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मीडिया: मीडिया द्वारा आसान सांस्कृतिक(Cultural) आदान-प्रदान में दुनिया के हर समाज मेंमें सांस्कृतिक /कल्चरल प्रक्टिसेस, मूल्यों और विचारों का प्रसार और साझाकरण शामिल है। फिल्म, टेलीविजन, म्यूजिक, लिटरेचर और इंटरनेट जैसे माध्यमों से, इंसान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से अनेक सांस्कृतिक सामग्री तक आसानी से पहुंच सकते हैं और उससे जुड़ भी सकते हैं, जिससे क्रॉस-कल्चरल समझ, प्रशंसा और बातचीत में बढ़ावा होता है। यह आदान-प्रदान न केवल लोगों के अनुभवों को संपन्न करता है बल्कि सांस्कृतिक डाइवर्सिटी को भी बढ़ावा देता है और भौगोलिक(Geographical) सीमाओं को पार करके और विविध बैकग्राउंड के लोगों के बीच संबंधों को सुविधाजनक बनाकर ग्लोबल इंटरकनेक्टेडनेस को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, मीडिया प्लेटफ़ॉर्म कम्युनिकेशन, संवेदना और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने के लिए चैनल के रूप में काम करते हैं, जो डेवलपमेंट और ग्लोबल कम्युनिटी में आपसी भाईचारे को बढ़ावा देते है।
  • वातावरणीय कारक: वातावरणीय कारक जैसे की जलवायु परिवर्तन, बायोडायवर्सिटी का नुकसान, प्रदूषण और संसाधनों की कमी जैसी स्थितियों को संदर्भित करते हैं जो की इकोसिस्टम और मानव समाज के ऊपर गेहरा असर डालते है। वैश्वीकरण के संदर्भ में, दुनिया भर में आपस में जुड़ी अर्थव्यवस्थाओं और समाजों के कारण ये फैक्टर्स बड़े पैमाने पर महत्वपूर्ण हो गए हैं। चरम मौसम ,बढ़ते तापमान की घटनाएँ और प्रदूषण से इकोसिस्टम और ह्यूमन वेलफेयर को खतरा है, जो एनवायर्नमेंटल चुनौतियों से निपटने और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल सहयोग की आवश्यकता पर रौशनी डालता है।

वैश्वीकरण के 5 प्रभाव:

वैश्वीकरण के 5 प्रभाव

  • आर्थिक विकास: वैश्वीकरण ने बाजारों को बड़ा बनाकर, हमारे उत्पादनो को बढ़ाकर, नए विचारों और कम्पटीशन को प्रोत्साहित करके अर्थव्यवस्थाओं को सही तरीके से बढ़ने में मदद की है। जब भी देश में सही तरीके और अधिक सवतंतर रूप से व्यापार होता है, तो व्यापार दुनिया भर में अधिक लोगों /ग्राहकों तक पहुँचता हैं, जिसका फ़ायदा ज़्यादा बिक्री और वृद्धि के रूप में होता है। विश्वीकरण बुसिनेस्सेस को करने के लिए सही रस्ते खजने के लिए प्रोत्साहित करता है, जैसे की ऐसी तकनीकोईयो को इस्तेमाल करना जो सामान को काम दामों में और तेज़ी से त्यार कर सकें। आज के दौर में विश्व स्तर  पर हर कंपनी आपस में कम्पटीशन कर  रही है और सभी नए विचारों के साथ अच्छे और बेहरत प्रोडक्ट्स बनाने की कोशिश में  है । कुल मिलाकर, वैश्वीकरण बाज़ारों को खोलकर, उत्पादन को और अधिक कुशल बनाकर और कंपनियों को और आधुनिक होने के लिए प्रेरित करके अर्थव्यवस्थाओं को विकसित करने में एक बड़ी मदद कर रहा है।
  • जॉब क्रिएशन और लेबर गतिशीलता: वैश्वीकरण ने दुनिया भर में जॉब क्रिएशन और श्रम गतिशीलता को एक नया अक्कर दे दिया है । इसने ग्लोबल व्यापार और निवेश में वृद्धि के कारण काफी क्षेत्रों में रोज़गार के  नए-नए अवसर खोल दिए है । पर इसके विपरीत, आउटसोर्सिंग और तकनीकी प्रगति के कारण जॉब डिस्प्लेसमेंट और लेबर मार्केट में काफी बदलाव भी आया है। इसके कारण सीमाओं के आरपार लेबर की आवाजाही में भी काफी बढ़ोतरी हुई है क्यूंकि कंपनियां लगातार स्किल्ड लेबर की तलाश कर रही है । विश्वीकरण ज़रूर जॉब क्रिएशन और लेबर गतिशीलता जैसे अवसर पैदा करता है पर इसके साथ-साथ काफी सारी चुनौतियों को भी पेश करता है जैसे की  जॉब लॉसेस और कुछ कंपनियों पर वेतन का दबाव । विश्वीकरण के फायदे सबको पहुंचने के लिए हमें ऐसी नीतियों और नियमों की ज़रुरत है जो लेबर और वर्कर्स को अदलाव के साथ ढलने  में मदद करें, यानि सबको अच्छी और अपनी क्षमता अनुआर नौकरी पाने का मौका मिलना चाहिए और उन लोगो को सपोर्ट करना चाहिए जो विश्वीकरण के कारण  अपनी नौकरी खो सकते है I
  • राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन: वैश्वीकरण के परिणामस्वरूप उल्लेखनीय सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन के साथ-साथ राजनीतिक शक्ति की गतिशीलता में भी महत्वपूर्ण बदलाव आया है । इसने गवर्नेंस संरचनाओं को भी काफी ज़्यादा प्रभावित किया है, सरकारों के काम करने और निर्णय लेने के तरीके को काफी  हद तक बदल दिया है सोशल नोर्मा काफी विकसित हुए हैं, जो ग्लोबल इंटरेक्शन्स से प्रभावित बदलते नज़रिये और वैल्यूज को दर्शाता है। इसके अलावा वैश्वीकरण ने लोगो और समुदायों की आइडेंटिटी फार्मेशन में एहम भूमिका निभाई जिसकी वजह से विभिन्न लोग और समुदाय एक इंटरलिंकेड दुनिया में खुद को आसानी से ढाल पा रहे हैं । राष्ट्रों के बीच बढ़ती इंटरकनेक्टेडनेस और इंटरडेपेंडेंस ने राजनीतिक गठबंधनों और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को भी प्रभावित किया है, जिससे जियो-पॉलिटिकल गतिशीलता में बदलाव आया है। कुल मिलाकर, वैश्वीकरण के कारण विभिन्न प्रकार के राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर आये हैंI
  • व्यापार और निवेश में वृद्धि: वैश्वीकरण ने व्यापारों के लिए अपने प्रोडक्ट्स को दूसरे देशों में लोगों को बेचना बहुत आसान बना दिया है। यह एक बड़े बाजार को खोलने जैसा है जहां कंपनियां अपनी सीमाओं से परे नए ग्राहकों को ढूंढ सकती हैं। इस्से न केवल व्यापारों को बढ़ने में मदद मिलती है बल्कि कंस्यूमर्स को चुनने के लिए अधिक और विभिन्न विकल्प भी मिलते हैं। व्यापार और निवेश में वृद्धि के साथ, कंपनियां अपने अपने ऑपरेशन्स का विस्तार कर  सकती हैं, अधिक से अधिक नौकरियां पैदा कर सकती हैं और अधिक पैसा भी ला सकती हैं। कुल मिलाकर, वैश्वीकरण ने दुनिया को आर्थिक रूप से बड़े पैमाने पर जुड़ा हुआ बना दिया है, जिससे व्यापारों और कंस्यूमर्स दोनों को विकास और विकल्प के अधिक अवसर मिल रहे हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: वैश्वीकरण के कारण पर्यावरण में बड़े बदलाव आये हैं। देशों के बीच अधिक व्यापार होने के कारण, कंपनियों को प्रोडक्ट्स बनाने के लिए पेड़ और तेल जैसे अधिक संसाधनों की ज़रुरत होती है। इसका मतलब है अधिक प्राकृतिक रिसोर्सेज का उपयोग करना और अधिक पेड़ों की कटाई करना, जो पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँचता है । इसके अलावा, जैसे-जैसे अधिक सामान दुनिया भर में बनाया और भेजा जाता है, इससे पानी और वायु में अधिक प्रदूषण होता है। इस जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी दिन प्रतिदिन गरम होती चले जा रही है जिसकी वजह से  एक्सट्रीम मौसम जैसे की तूफ़ान और हीटवेव जैसी कंडीशंस बढ़ती जा रही हैं। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है की वैश्वीकरण के कारण पर्यावरण को काफी नुक्सान पहुंच रहा हैI

भारत में वैश्वीकरण  के प्रभाव

वैश्वीकरण ने भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाए हैं, जिसकी वजह से इसकी अर्थव्यवस्था और समाज के अनेक पहलुओं पर भारी प्रभाव पड़ा है। सबसे पहले, इसने अलग अलग क्षेत्रों, खासकर टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा दिया है। कंपनियों द्वारा विश्व स्तर पर अपने ऑपरेशन्स का फ़ैलाने के साथ, स्किल्ड वर्कर्स की डिमांड बढ़ रही है, जिसके कारण कई भारतीयों के लिए रोजगार के विभिन्न अवसर पैदा हो रहे हैं। नौकरियों की इस इनफ्लो ने न केवल बेरोजगारी कम की है बल्कि कंस्यूमर्स का और इन्वेस्टमेंट को बढ़ाकर आर्थिक विकास में भी बहुत बड़ा योगदान दिया है।

इसके अलावा, वैश्वीकरण ने भारतीयों के जूस और सर्विसेज तक पहुंचने के ज़रिये में क्रांति ला दी है। दुनिया भर से प्रोडक्ट्स की उपलब्धता ने कंस्यूमर्स के लिए विकल्पों का विस्तार किया है और बाजार में उपलब्ध वस्तुओं की क्वालिटी में भी इज़ाफ़ा किया है। चाहे वह कपड़े हों, स्मार्टफोन हो, या खाद्य पदार्थ ही क्यों न हों, भारतीयों के पास अब प्रोडक्ट्स की अनेक रेंज तक पहुंच है, जो उनके जीवन को संपन्न बनाती है और उनके जीवन स्तर को बढ़ाती है।

इसके अतिरिक्त, वैश्वीकरण ने भारत की आर्थिक ग्रोथ को आगे बढ़ाने में एक एहम योगदान दिया है । अन्य देशों के साथ व्यापार और इन्वेस्टमेंट को बेहद आसान बनाकर, वैश्वीकरण ने भारतीय व्यापारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के नए-नए रास्ते खोल दिए हैं। इससे फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट एक्सपोर्ट और आर्थिक समृद्धि में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, वैश्वीकरण ने भारत में टेक्नोलॉजी और विचारों के फ्लो को तेज कर दिया है, जिससे उद्योगों प्रोडक्टिविटी और इनोवेशन में वृद्धि हुई है।

हालाँकि, भारत के लिए वैश्वीकरण ने काफी चुनौतियां भी प्रस्तुत की है। जहाँ इसने रोजगार के कई अवसर पैदा किए हैं, वहीं विदेशों से बढ़ते कंपटीशन के कारण कुछ क्षेत्रों में नौकरियां भी खत्म हो गई हैं। विशेष रूप से छोटे व्यापारों को मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन के साथ संघर्ष करना पड़ रहा है। इसके अलावा, वैश्वीकरण ने सांस्कृतिक समरूपीकरण और पर्यावरणीय क्षरण से जुड़ी चिंताओं को बढ़ा दिया है। कुल मिलाकर, जहाँ एक तरफ वैश्वीकरण भारत के लिए महत्वपूर्ण लाभ लाया है वहीँ दूसरी तरफ इसके कुछ नुक्सान भी भारत को हुए है जिनको सही तरीके से एड्रेस करना   ज़रूरी है ताकि इसका लाभ सब उठा सकेंI

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Conclusion

वैश्वीकरण एक व्यापक प्रक्रिया है जो विश्वभर में आर्थिक, तकनीकी, सांस्कृतिकऔर राजनीतिक क्षेत्रों में इंटीग्रेशन और इंटरेक्शन को बढ़ावा देती है। यह ग्लोबल मार्किट, नई तकनीकों का प्रसार, और अधिकांश लोगों की ज़िंदगी में प्लांड तरीके से महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आता है । हालांकि, इसके साथ ही, यह असमानता, पर्यावरणीय गिरावट, सांस्कृतिक एकरूपता और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण चुनौतियों का भी कारण बनता है।

वैश्वीकरण के कारणों में आर्थिक उदारीकरण, ग्लोबल सप्लाई चेन्स, टेक्नोलॉजी की प्रगति, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, और वातावरणीय कारक शामिल हैं। इन कारणों के परिणामस्वरूप वैश्वीकरण ने आर्थिक विकास, जॉब क्रिएशन, व्यापार और इन्वेस्टमेंट में वृद्धि, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के बहुत अवसर पैदा किए हैं।

भारत में वैश्वीकरण के प्रभाव भी महत्वपूर्ण हैं। वैश्वीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दी है और देश को ग्लोब  मंच पर उभारने में भी बड़ा योगदान दिया है। यहाँ तक कि भारतीय व्यापारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के नए-नए रास्ते खोल दिए हैं। हालांकि, वैश्वीकरण ने भी कुछ चुनौतियों को सामने रखा है, जैसे नौकरियों की हानि और वातावरण संबंधी मान भंग। भारत को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सकारात्मक और उचित अप्रोच को अपनाना होगा।