चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं: वैज्ञानिकों ने की 2024 में एक amazing खोज

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं, इससवाल का उत्तर खोजने में वैज्ञानिकों ने जानवरों की गति के बारे में एकअचंभित कर देने वाला खुलासा करा है, जिससे साफ़ होता है कि चीते जैसे तेज़ जानवर इतनी तेज़ गति तक कैसे पहुंच जाते हैं। इस खोज में वैज्ञानिकों ने 400 से अधिक प्रजातियों के ज़मीनपर रहने वाले जानवरों की गति और आकार के आंकड़ों की Study कि, और उनके पूर्वानुमानों की तुलना की। आइये विस्तार से जानते हैं चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं।

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं

चीते इतने तेज़ क्यों होते है इसको जानने के लिए हमें उनका शरीर कैसे बना होता है और वे समय के साथ कैसे अनुकूलित होते हैं, इन सब बातों को समझना बेहद ज़रूरी है । उनके पास लंबे, पतले शरीर और पैर होते है, जो उन्हें तेज़ी से दौड़ने में मदद करते हैं। उनकी मांसपेशियाँ, विशेषकर उनके पिछले पैरों की, काफी ज़यादा मजबूत होती हैं जो उन्हें तेज़ दौड़ने में मदद करती हैं। चीते के फेफड़े और नाक भी बड़े होते हैं, जो तेज़ दौड़ने पर उन्हें बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन लेने में मदद करते हैं।

यह ऑक्सीजन उन्हें चलते रहने और ऊर्जा देने के लिए महत्वपूर्ण होती है । उनके दिल और blood vessels भी उनकी मांसपेशियों में ऑक्सीजन से भरे रक्त को pump करने में वास्तव में अच्छे होते है। चीतों की आंखें बड़ी होती हैं जिसकी मदद से वह काफी अच्छी तरह देख सकते हैं, जिससे उन्हें शिकार को पहचानने और तेज दौड़ने पर बाधाओं से बचने में मदद मिलती है। चीते को ज़मीन पर सबसे तेज़ जानवर बनाने के लिए ये सभी सुविधाएँ समय के साथ विकसित हुई हैं।

Evolutionary रूप से, चीतों ने अपने प्राकृतिक आवास में जीवित रहने के लिए अविश्वसनीय रूप से तेज गति अपना ली है, जहां शिकार का शिकार करने और शिकारियों से बचने के लिए तेज़ गति की आवश्यकता होती है । वे वह छोटी दौड़ को चुटकी में लगाने में सक्षम होते है, अक्सर कुछ ही सेकंड में 60-75 मील प्रति घंटे (96-120 किलोमीटर प्रति घंटा) तक की गति तक पहुंच जाते हैं, जिससे वे सबसे तेज़ ज़मीन वाले जानवर बन जाते हैं।

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं: क्या कहती है नई खोज

Nature communications में प्रकाशित एक groundbreaking study में, Imperial कॉलेज लंदन, Harvard यूनिवर्सिटी, Queensland विश्वविद्यालय और Sunshine कोस्ट विश्वविद्यालय के researchers ने इस code का पता लगाया है कि अपने माध्यम आकर होने के बावजूद चीते इतने तेज़ क्यों होते है या इतना तेज़ क्यों दौड़ते है । यह खोज पारंपरिक ज्ञान को चुनौती देती है, जो सुझाव देता है कि बड़े जानवरों को, उनकी अधिक ताकत और लंबे अंगों के साथ, सबसे तेज़ होना चाहिए।

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं: दो प्रमुख सीमाएँ

Research से पता चलता है कि किसी जानवर की अधिकतम दौड़ने की गति किसी एक सीमा से तय नहीं होती है, बल्कि दो महत्वपूर्ण कारकों से तय होती है: पहला की उसकी मांसपेशियां कितनी  ज़्यादा तेजी से सिकुड़ सकती हैं और दूसरा की, कितनी ज़्यादा दूर तक सिकुड़ सकती हैं। छोटे जानवरों, जैसे चींटियों, की मांसपेशियां होती हैं जो तेजी से सिकुड़ती हैं लेकिन लेकिन वे कितनी दूर तक जा सकती है इसकी एक सीम होती है, जैसे कि कम गियर में साइकिल चलाने पर।

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं
Credit: MATEO JURIC/GETTY

इसके विपरीत, हाथियों जैसे बड़े जानवरों को इसके बिलकुल विपरीत चुनौती का सामना करना पड़ता है; उनकी मांसपेशियाँ अधिक दूरी तक सिकुड़ सकती हैं लेकिन उनके शरीर के आकार के relatively सिकुड़ने में धीमी होती हैं, जैसे कि ऊंचे गियर में ऊपर की ओर साइकिल चलाना।

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं: गति का “Sweet Spot”

Research  लगभग 50 kg के एक भौतिक “Sweet Spot” की पहचान की, जहां ये दोनों सीमाएं मिलती हैं। चीते के समान इस आकार के जानवर 65 miles प्रति घंटे तक की remarkable गति हासिल करने में सक्षम हैं। Factors का यह convergence उन्हें अपनी मांसपेशियों के संकुचन (contraction) की गति और efficiency दोनों को अधिकतम करने की अनुमति देता है, जिससे वे प्रकृति के धावक (sprinters) बन जाते हैं।

विकास और भविष्य की Research के लिए implications

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं के बारे में ये findings न केवल जानवरों की गति के biomechanics पर प्रकाश डालते हैं बल्कि यह भी जानकारी देते हैं कि विभिन्न प्रजातियों में मांसपेशियां कैसे विकसित हुई हैं। Research में जानवरों के साम्राज्य से परे निहितार्थ हैं, जो जानवरों की agility और गति की नकल करने वाले robotic सिस्टम के डिजाइन के लिए संभावित insight प्रदान करते हैं।

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Credit: विकिमीडिया कॉमन्स

हालांकि research ज़मीनी जानवरों पर केंद्रित थी, researchers  ने अपने मॉडल को उड़ने और तैरने वाले जानवरों पर भी लागू करने की योजना बनाई है। यह शोध उन भौतिक बाधाओं को समझने के लिए रोमांचक रास्ते खोलता है, जिन्होंने छोटे से छोटे कीड़ों से लेकर सबसे बड़े स्तनधारियों तक, पूरे विकासवादी इतिहास में जानवरों की आवाजाही को आकार दिया है।

FAQs

चीते में कितनी ताकत होती है?

इसका जवाब उनके शारीरिक गुणों में छिपा है। उनके लम्बे पैर और कम भार उन्हें तेज गति तक पहुंचाते हैं। इसके अलावा, चीते के मांसपेशियों में तेजी से संकुचन की क्षमता भी होती है जो उसे तेज दौड़ने में मदद करती है।

शेर और चीते में क्या अंतर है?

शेर और चीते में अंतर आकार और holding power में है। शेर बड़े और ज्यादा भारी होते हैं, जबकि चीते छोटे और हल्के होते हैं। शेर की holding power भी अधिक होती है जिससे वे बड़ी और भारी शिकार को पकड़ सकते हैं, जबकि चीते की holding power कम होती है जिससे वे अधिकतर छोटे और तेज शिकार को पकड़ सकते हैं।

वर्तमान में भारत में कुल कितने चीते हैं?

भारत में कुल 20 चीते हैं। इनमें से 12 चीतों को 2022 में नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश में लाया गया था। अन्य आठ चीतों को 2023 में कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था।

तेंदुए और चीते में क्या फर्क होता है?

चीते के शरीर पर गोल धब्बे होते हैं, जबकि तेंदुए के शरीर पर rosette-style के निशान होते हैं. तेंदुआ, चीते के मुकाबले ज्यादा बड़ा होता है और अधिक muscular होता है. यह हिरन जैसे जानवर का शिकार करने के बाद उसे पेड़ पर ऊपर ले जाने की ताकत रखता है. चीते के मुकाबले तेंदुओं का सिर बड़ा और लम्बा होता है.

चीता पेड़ पर चढ़ सकता है क्या?

चीता पेड़ पर नहीं चढ़ सकता है वह केवल गुर्राता है और दहाड़ भी नहीं सकता।

Conclusion

चीते एक रोमांचक जानवर हैं जो अपनी अद्वितीय गति और चुस्ती से प्रसिद्ध हैं। चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं हमें इसका जवाब एक इस नए research से पता चलता है। हमें पता चलता है कि उनकी गति का रहस्य उनके शारीरिक गुणों और एनाटॉमी में छिपा हुआ है। चीते के सर्वोच्च दौड़ने की गति का खोज ने एक महत्वपूर्ण सत्य का पता लगाया है कि उनके शरीर का आकार और मांसपेशियों की क्षमता उनकी गति पर कैसे प्रभाव डालती है।

चीते इतने तेज़ क्यों होते हैं इसका जवाब चीते की गति और चुस्ती से जुड़ा रहस्य उनके शारीरिक गुणों और एनाटॉमी में छिपा होता है। एक नए अध्ययन से पता चलता है कि चीते के शरीर का आकार और मांसपेशियों की क्षमता उनकी अद्वितीय गति को नियंत्रित करती हैं।